वैश्विक आरएंडडी सेवा बाजार के 50 प्रतिशत हिस्से पर नजर के साथ भारत का ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर जोर

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन 

ओडिशा ताजा न्यूज् (२०जनबरी , बुधबार ) नई दिल्ली  :- भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार और वाणिज्य विभाग ने फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंस से “देश से आरएंडडी सेवा निर्यात को संवर्धन” पर पहली राउंडटेबल के आयोजन की पहल की है। राउंडटेबल में 180 से ज्यादा वैज्ञानिकों, सरकारी निजी अनुसंधान संगठनों ने भाग लिया था। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग, आर्थिक मामलों के विभाग, विदेश मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, दूरसंचार विभाग, एमईआईटीवाई, सीएसआईआर, आईसीएमआर, व्यापार, शिक्षा क्षेत्र, स्टार्टअप सदस्यों और अनुभवी निर्यातकों और कई अन्य सरकारी व निजी संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

राउंडटेबल को संबोधित करते हुए फियो के अध्यक्ष श्री शरद कुमार सराफ ने सरकार के आरएंडडी सेक्टर में निवेश दोगुना से ज्यादा बढ़ाकर जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत करने के फैसले की सराहना की  उन्होंने कहा कि इससे आरएंडडी सेवा क्षेत्र को आगे बढ़ने और आने वाले वर्षों में अपना निर्यात दोगुना करने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने राज्य सरकारों से भी आरएडंडी सेवा क्षेत्र में ज्यादा भागीदारी और सहयोग बढ़ाने के लिए आगे आने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, वर्तमान में यह केंद्र सरकार के लिए आरएंडडी सेवा निर्यात को प्रोत्साहन देने की दिशा में अहम कार्य है। श्री सराफ ने सरकार से एसईआईएस जैसी योजनाओं के माध्यम से, देश में सही बुनियादी ढांचा और इकोसिस्टम तैयार करके, सही नियामकीय व्यवस्था उपलब्ध कराकर, कर व्यवस्था को व्यवस्थित करके,

सेक्टर को प्रोत्साहन देकर और विकास सुनिश्चित करके व अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक समान अवसर उपलब्ध कराकर आरएंडडी सेवा निर्यात को बढ़ावा देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उच्च तकनीक निर्यात पर ज्यादा ध्यान देकर भारत के निर्यात की स्थिति बदलने के लिए आरएंडडी खासा अहम है। भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के विजयराघवन ने मुख्य संबोधन देते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी से भविष्य के लिए कई सबक मिले हैं। एक प्रमुख सबक यह है कि देशों को ऐसे संकट से बचने के क्रम में आरएंडडी में अपना निवेश बढ़ाने की जरूरत है  वैश्विक भागीदारी और समन्वय के माध्यम से भी आरएंडडी में निवेश किए जाने की जरूरत है। दुनिया भर में आरएंडडी सेवाओं के आदान प्रदान के महत्व को कम आंका गया है। आज आरएंडडी निर्यात का महत्व खासा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक नीति निर्माताओं का ध्यान उच्च तकनीक

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